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छठ महापर्व: बतोकला सूर्य मंदिर और राजा तालाब में उमड़ा आस्था का सैलाब, दिखा भक्ति का अद्भुत नज़ारा


केतार/बतोकला (गढ़वा): छठ महापर्व के पावन अवसर पर, सोमवार की शाम बतोकला स्थित प्राचीन सूर्य मंदिर और राजा तालाब के घाटों पर श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा। यह दृश्य आस्था और लोक परंपरा के अद्भुत संगम को दर्शा रहा था। शाम लगभग चार बजे से ही, पवित्र छठव्रती महिलाएँ और श्रद्धालु घाट की ओर पहुँचना शुरू हो गए।

सभी ने पवित्र जल में स्नान कर, पारंपरिक वेशभूषा में भगवान भास्कर की श्रद्धापूर्वक उपासना की। व्रतियों ने सूप और डाला में फल, ठेकुआ और अन्य सामग्री सजाकर अस्ताचलगामी (डूबते हुए) सूर्य को पहला अर्घ्य अर्पित किया और अपने परिवार की सुख-समृद्धि, स्वास्थ्य तथा मंगलकामना की। पूरा वातावरण “जय छठी मइया” और “जय भगवान भास्कर” के जयघोष से गूंज उठा। इस भक्तिमय माहौल में चारों ओर आस्था और उत्साह का आलोक (प्रकाश) फैल गया। तालाब किनारे जगमगाते दीपों की रोशनी और छठ गीतों की मधुर गूंज ने पूरे इलाके को अलौकिक और भक्ति भाव से परिपूर्ण बना दिया।

प्रशासन की विशेष व्यवस्था:
श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए, राजा तालाब परिसर में प्रशासन की ओर से विशेष प्रबंध किए गए थे। प्रकाश व्यवस्था, स्वच्छ पेयजल, सुरक्षा और साफ-सफाई पर विशेष ध्यान दिया गया। पुलिस बल के जवान, मंदिर निर्माण समिति और स्थानीय पूजा समिति के सदस्य लगातार सक्रिय रहकर व्यवस्था बनाए रखने में सहयोग कर रहे थे, ताकि किसी भी श्रद्धालु को कोई असुविधा न हो।सूर्य मंदिर परिसर में भी सैकड़ों की संख्या में व्रती और श्रद्धालु पूजा-अर्चना के लिए मौजूद रहे। मंदिर के पुजारियों द्वारा भी बढकर भाग लिया गया।
कल सुबह उदयमान सूर्य को अर्घ्य की तैयारी: शाम को प्रथम अर्घ्य देने के बाद, अब श्रद्धालुओं ने मंगलवार की सुबह उदयमान (उगते हुए) सूर्य को अंतिम अर्घ्य अर्पित करने की तैयारी पूरे उत्साह के साथ शुरू कर दी है। छठ महापर्व के इस अवसर पर बतोकला सूर्य मंदिर और राजा तालाब के घाटों पर भक्ति, अनुशासन और लोकपर्व की अनूठी छटा देखने को मिली, जिसने हर किसी का मन मोह लिया।

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