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शौचालय, पानी, नेटवर्क, शिक्षा सब गायब—मकर संक्रांति के बाजार की रौनक के बीच आदिवासियों का दर्द बेनकाब।

शौचालय, पानी, नेटवर्क, शिक्षा सब गायब—मकर संक्रांति के बाजार की रौनक के बीच आदिवासियों का दर्द बेनकाब

सोनभद्र जिले के चोपन ब्लॉक अंतर्गत ग्राम पंचायत पडरछ के भालुकुदर, सदुआरी, साधुबथान, ठुठीसेमर, सरैया और पुरानडीह टोलों के बीच सदुआरी में 14 जनवरी मकर संक्रांति के अवसर पर हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी “लाइव चूड़ा” का पारंपरिक बाजार लगाया गया। यह बाजार हर रविवार को लगता है और बड़ी संख्या में ग्रामीणों की मौजूदगी देखने को मिली। बाजार की रौनक के बीच जब आदिवासी बहुल क्षेत्र की हकीकत सामने आई, तो विकास के दावों की पोल खुलती नजर आई।
बताया जाता है कि इस पंचायत में 80 प्रतिशत से अधिक आबादी आदिवासियों की है, इसके बावजूद बुनियादी सुविधाओं का घोर अभाव है। सदर विधायक भूपेश चौबे और राज्य मंत्री संजीव सिंह गोंड के निजी कार्यालयों से लगभग 70 किलोमीटर दूर स्थित इस पंचायत पर जनप्रतिनिधियों और प्रशासन का ध्यान नहीं पहुंच पा रहा है। स्थानीय आदिवासियों का कहना है कि तीन पीढ़ियों से वे यहां रह रहे हैं, लेकिन आज तक न पक्का आवास मिला, न शौचालय, न ही पीने के लिए शुद्ध पानी।
हुसियाल गोड़ सहित अन्य ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री आवास और शौचालय योजना केवल कागजों तक सीमित रह गई है। पंचायत में एक भी शौचालय जमीनी स्तर पर पूरी तरह तैयार नहीं है। आदिवासियों का आरोप है कि गरीबों के हिस्से की सरकारी सुविधाएं जिम्मेदार अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों की मिलीभगत से हजम कर ली गईं।
ग्रामीणों ने यह भी बताया कि मोबाइल नेटवर्क न होने से स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हो रही हैं। कई बार डीएम कार्यालय में पत्राचार और सोशल मीडिया के माध्यम से शिकायतें की गईं, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई या आश्वासन नहीं मिला। शिक्षा व्यवस्था की हालत भी चिंताजनक है। स्कूल भवन तो हैं, लेकिन शुद्ध पानी, मध्यान्ह भोजन और शिक्षकों की नियमित उपस्थिति नहीं होने से बच्चे अशिक्षा की ओर धकेले जा रहे हैं।
आदिवासियों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही जांच कर सुविधाएं नहीं दी गईं तो वे आगामी ग्राम प्रधान चुनाव का बहिष्कार करेंगे। उनका कहना है कि जब सरकार की योजनाओं का लाभ नहीं मिल रहा, तो वोट देने का कोई औचित्य नहीं रह जाता। अब देखना यह है कि क्या शासन-प्रशासन और जनप्रतिनिधि इस गंभीर स्थिति पर संज्ञान लेकर आदिवासी समाज के जीवन और भविष्य को संवारने के लिए ठोस कदम उठाते हैं या नहीं।

सोनभद्र से जितेंद्र प्रसाद
भारत दृष्टि लाइव न्यूज

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