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RTI की अनदेखी या प्रशासनिक लापरवाही? 6 माह से न्याय की आस में भटक रहा युवक निष्पक्ष जांच की मांग।

RTI की अनदेखी या प्रशासनिक लापरवाही? 6 माह से न्याय की आस में भटक रहा युवक निष्पक्ष जांच की मांग

दुद्धी (सोनभद्र)। सूचना का अधिकार (RTI) अधिनियम के तहत मांगी गई जानकारी न मिलने और लगातार शिकायतों के बावजूद कार्रवाई न होने से एक युवक खुद को प्रशासनिक उपेक्षा का शिकार बता रहा है। ग्राम पंचायत से जारी आय प्रमाण पत्र के मानकों एवं प्रक्रिया संबंधी जानकारी के लिए उमा प्रसाद उर्फ उमंग गुप्ता ने 4 दिसंबर 2025 को तहसीलदार कार्यालय दुद्धी में ऑनलाइन आरटीआई आवेदन दाखिल किया था। आरोप है कि निर्धारित समय सीमा बीत जाने के बाद भी उन्हें सूचना उपलब्ध नहीं कराई गई।सूचना न मिलने पर उन्होंने प्रथम अपील उपजिलाधिकारी कार्यालय दुद्धी में दाखिल की, लेकिन वहां भी कोई सुनवाई या आदेश नहीं हुआ। इसके बाद उन्होंने जिलाधिकारी सोनभद्र, अपर जिलाधिकारी (न्यायिक), राजस्व परिषद लखनऊ सहित कई उच्चाधिकारियों को पत्र भेजकर पूरे मामले से अवगत कराया। उनका आरोप है कि जवाब के नाम पर तहसीलदार कार्यालय से ऐसा पत्र जारी किया गया जिसमें न तो मूल आरटीआई आवेदन का स्पष्ट उल्लेख था और न ही मांगी गई जानकारी का संतोषजनक उत्तर।उमंग गुप्ता का कहना है कि उन्होंने 19 मई 2026 को मुख्यमंत्री कार्यालय, राजस्व मंत्री, पीजी पोर्टल और आईजीआरएस पोर्टल पर 26 पन्नों के साक्ष्यों के साथ विस्तृत शिकायत दर्ज कराई, लेकिन अब भी निष्पक्ष कार्रवाई की उम्मीद अधूरी है। उनका आरोप है कि शिकायतों की जांच उन्हीं कार्यालयों को सौंपी जा रही है जिनके खिलाफ शिकायत की गई है, जिससे निष्पक्षता पर गंभीर प्रश्न खड़े होते हैं।उन्होंने मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री से अपील करते हुए कहा कि यदि एक आम नागरिक की वैधानिक शिकायतों पर भी समयबद्ध और निष्पक्ष कार्रवाई नहीं होती, तो पारदर्शिता और जवाबदेही की व्यवस्था पर जनता का विश्वास कमजोर होता है। उन्होंने पूरे मामले की जांच किसी स्वतंत्र एवं निष्पक्ष अधिकारी या विशेष जांच टीम से कराने तथा दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।यह मामला अब केवल एक आरटीआई आवेदन तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि प्रशासनिक जवाबदेही, पारदर्शिता और आम नागरिक के अधिकारों से जुड़ा महत्वपूर्ण प्रश्न बन गया है। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि उच्च स्तर पर इस मामले को कितना गंभीरता से लिया जाता है।

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