
विण्ढमगंज में यूरिया खाद की कालाबाजारी का खुला खेल, तय मूल्य ₹266.50 की जगह ₹400 वसूली का आरोप।
उत्तर प्रदेश–झारखंड सीमा पर स्थित विण्ढमगंज क्षेत्र में जिला सहकारी खाद्य वितरण प्रणाली के अंतर्गत यूरिया खाद की खुलेआम कालाबाजारी किए जाने का गंभीर मामला प्रकाश में आया है। स्थानीय किसानों का आरोप है कि शासन द्वारा निर्धारित ₹266.50 प्रति बोरी मूल्य की अनदेखी करते हुए उनसे ₹400 प्रति बोरी वसूली की जा रही है।
किसानों का कहना है कि यूरिया खाद प्राप्त करने के लिए उन्हें घंटों लाइन में लगना पड़ रहा है, जबकि दूसरी ओर सहकारी वितरण के माध्यम से खाद को खुलेआम पड़ोसी राज्य झारखंड में भी सप्लाई किया जा रहा है। इससे स्थानीय किसानों में भारी रोष व्याप्त है। सीमावर्ती क्षेत्र होने का लाभ उठाकर अवैध ढुलाई और ऊँचे दामों पर बिक्री की जा रही है।
इस पूरे मामले में खाद दुकानदार सुरेश यादव पर गंभीर आरोप लगे हैं। किसानों के अनुसार, सुरेश यादव द्वारा यूरिया खाद के साथ जिंक और अन्य उत्पाद जबरन खरीदने के लिए मजबूर किया जा रहा है। यदि कोई किसान अतिरिक्त सामग्री लेने से इनकार करता है, तो उसे खाद देने से मना कर दिया जाता है, जो शासन के स्पष्ट निर्देशों का उल्लंघन है।
मामला उस समय और गंभीर हो गया जब एक किसान ने खाद की कालाबाजारी और जबरन बिक्री का वीडियो बनाना शुरू किया। आरोप है कि दुकानदार सुरेश यादव ने वीडियो बनाते देख किसान का मोबाइल छीनने का प्रयास किया, हालांकि तब तक वीडियो रिकॉर्ड हो चुका था। वीडियो में खाद की कालाबाजारी से जुड़े साक्ष्य होने की चर्चा क्षेत्र में तेजी से फैल गई है।
गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश शासन द्वारा यूरिया खाद का अधिकतम खुदरा मूल्य ₹266.50 प्रति बोरी निर्धारित है तथा टैगिंग और अतिरिक्त उत्पादों की जबरन बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध है। इसके बावजूद नियमों की खुलेआम अवहेलना की जा रही है, जिससे छोटे और सीमांत किसान आर्थिक रूप से परेशान हैं।
किसानों एवं जनप्रतिनिधियों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराई जाए, वीडियो साक्ष्यों के आधार पर दोषी दुकानदार और जिम्मेदार अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई हो तथा किसानों को निर्धारित मूल्य पर खाद उपलब्ध कराई जाए। शासन की कार्रवाई न होने की स्थिति में आंदोलन की चेतावनी भी दी गई है।
विण्ढमगंज, सोनभद्र से — जितेन्द्र प्रसाद
भारत दृष्टि लाइव न्यूज



