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सीता मोड़ चौराहे पर अलाव नदारद, कड़ाके की ठंड में जनता बेहाल, प्रशासन की संवेदनहीनता उजागर
विण्ढमगंज (सोनभद्र)। कड़ाके की ठंड ने जनजीवन पूरी तरह से अस्त-व्यस्त कर दिया है, लेकिन विण्ढमगंज थाना क्षेत्र के अत्यंत महत्वपूर्ण सीता मोड़ चौराहे पर अब तक अलाव की कोई व्यवस्था न होना प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की संवेदनहीनता को उजागर करता है। दिसंबर माह की 20 तारीख बीत जाने के बावजूद शासन की ओर से यहां अलाव के लिए लकड़ी उपलब्ध नहीं कराई जा सकी है, जिससे स्थानीय जनता और राहगीरों में भारी आक्रोश है।
सीता मोड़ चौराहा उत्तर प्रदेश, झारखंड, बिहार, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ को जोड़ने वाला एक प्रमुख मार्ग है। इस चौराहे पर प्रतिदिन लगभग 50 से अधिक लोगों की भीड़ लगी रहती है, जिनमें यात्री, वाहन चालक, मजदूर और स्थानीय ग्रामीण शामिल होते हैं। सुबह-शाम बढ़ती ठंड और ठंडी हवाओं के बीच लोग ठंड से कांपते नजर आ रहे हैं। सबसे अधिक परेशानी बुजुर्गों, बच्चों और गरीब तबके के लोगों को हो रही है, जो ठंड से बचाव के सीमित साधनों पर निर्भर हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि हर वर्ष ठंड के मौसम में अलाव की व्यवस्था की जाती रही है, लेकिन इस बार न तो ग्राम प्रधान की ओर से कोई पहल की गई और न ही उच्च अधिकारियों ने इस ओर ध्यान दिया। आलम यह है कि लोग सड़क किनारे कागज, पन्नी या कचरा जलाकर ठंड से बचने की मजबूरी में हैं, जो दुर्घटना और आगजनी का खतरा भी बढ़ा रहा है।
राहगीरों और वाहन चालकों का आरोप है कि प्रशासन केवल कागजी योजनाओं तक सीमित रह गया है। जमीनी स्तर पर राहत का कोई इंतजाम नहीं दिख रहा। यदि यही हाल रहा तो ठंड से बीमारियों के फैलने और किसी बड़े हादसे की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।
अब सवाल यह उठता है कि जब सीता मोड़ जैसे व्यस्त और अंतरराज्यीय चौराहे पर अलाव की व्यवस्था नहीं हो पा रही है, तो ग्रामीण इलाकों की स्थिति क्या होगी। जनता मांग कर रही है कि प्रशासन और उच्च अधिकारी तत्काल संज्ञान लें और बिना देरी किए यहां अलाव के लिए लकड़ी की व्यवस्था कराई जाए, ताकि लोग कड़ाके की ठंड से राहत पा सकें।
विण्ढमगंज, सोनभद्र से
जितेन्द्र प्रसाद
भारत दृष्टि लाइव न्यूज़



