
सभी प्रिय दर्शकों को नमस्कार
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और मैं लेकर आया हूँ एक ऐसी खबर —
जो आदिवासी बहुमूल्य क्षेत्र के विकास पर बड़ा सवाल खड़ा करती है।

सोनभद्र जिला के दुद्धी ब्लॉक के ग्राम पंचायत औवराडन्डी की झलकियाँ
औवराडान्डी में ‘हर घर जल मिशन’ बना मज़ाक,
महीने में सिर्फ एक बार आता है पानी!
जी हाँ दर्शकों, यह हैरान करने वाला सच है उस योजना का
जिसका उद्देश्य था हर घर तक स्वच्छ पेयजल पहुँचाना।
सोनभद्र के इस आदिवासी बहुमूल्य क्षेत्र में करोड़ों की लागत से बनी पानी टंकी
आज सिर्फ नाम मात्र की शोभा बनकर रह गई है।
ग्रामीणों का कहना है कि पानी की सप्लाई महीने में सिर्फ एक बार होती है,
बाकी दिन उन्हें नदी, हैंडपंप या डेढ़ किलोमीटर दूर ‘चपक कल’ से पानी लाना पड़ता है।
“हर घर नल तो लगा है, लेकिन पानी नहीं आता…
गर्मी-बरसात में बहुत दिक्कत होती है।”
यह जलापूर्ति कार्य नमामि गंगे तथा ग्रामीण जल पूर्ति विभाग, उत्तर प्रदेश के तहत किया गया था।
परियोजना को विष्णु प्रकाश एंड पुगंलिया लिमिटेड संस्था ने पूरा किया।
परियोजना विवरण:
लागत: ₹1,68,83,000
कार्य प्रारंभ: 7 दिसंबर 2020
कार्य पूर्ण: 6 दिसंबर 2022
अभियंता: धर्मेंद्र यादव
सहायक अभियंता: अनिल कुमार
संस्था प्रतिनिधि: सुदर्शन विन्द
लेकिन अब वही टंकी सूनी पड़ी है —
नल सूखे हैं, और आदिवासी परिवार पानी के लिए भटक रहे हैं।
ग्रामीणों का आरोप है कि अधिकारी और ठेकेदार की लापरवाही के कारण
यह योजना ठप पड़ी है।
ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि
इस पूरे कार्य की जांच कराई जाए
और दोषी अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई हो —
ताकि जल जीवन मिशन का सपना साकार हो सके
और आदिवासी क्षेत्र का विकास हो।
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