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80 टन की बोरवेल मशीन गिरी, 120-120 टन की दो क्रेन से सीधी हुई; रेलवे अंडरपास की ऊंचाई पर कंपनी-रेलवे आमने-सामने।

80 टन की बोरवेल मशीन गिरी, 120-120 टन की दो क्रेन से सीधी हुई; रेलवे अंडरपास की ऊंचाई पर कंपनी-रेलवे आमने-सामने।

सोनभद्र जनपद के विंढमगंज थाना क्षेत्र में नेशनल हाईवे 39 पर स्थित घिवाही रेलवे क्रॉसिंग गेट नंबर 50 के पास बीते सप्ताह एक बड़ा हादसा हो गया। लगभग 80 टन वजनी बोरवेल मशीन रास्ता खराब होने के कारण ट्रेलर से असंतुलित होकर नीचे गिर गई। घटना के बाद कई घंटों तक मार्ग पर अफरा-तफरी का माहौल बना रहा और आवागमन भी प्रभावित हुआ।
स्थानीय लोगों के अनुसार यह भारी-भरकम मशीन एक ट्रेलर पर लदी हुई थी। जैसे ही वाहन रेलवे अंडरपास से गुजरने लगा, ऊंचाई और ब्रैकेटिंग की समस्या के चलते मशीन का संतुलन बिगड़ गया और वह सड़क किनारे गिर पड़ी। मशीन के गिरते ही तेज आवाज हुई और आसपास के लोग मौके पर जमा हो गए। गनीमत रही कि इस दौरान कोई जनहानि नहीं हुई।
बताया जा रहा है कि मशीन को दोबारा सीधा करने के लिए 120-120 टन क्षमता की दो बड़ी क्रेन मंगानी पड़ीं। काफी मशक्कत और घंटों की कड़ी मेहनत के बाद बोरवेल मशीन को सीधा किया जा सका। यह पूरा अभियान बेहद चुनौतीपूर्ण रहा, जिसे देखने के लिए आसपास के गांवों से भी लोग जुट गए।
घटना के बाद मशीन मालिक कंपनी और रेलवे विभाग के बीच नुकसान की भरपाई को लेकर तीखी नोकझोंक भी हुई। कंपनी की ओर से अंडरपास की ऊंचाई और संरचनात्मक बाधाओं को हादसे का कारण बताया जा रहा है, जबकि रेलवे सूत्रों का कहना है कि भारी मशीनों के परिवहन में सुरक्षा मानकों का पालन आवश्यक है। दोनों पक्षों के बीच जिम्मेदारी तय करने को लेकर चर्चा जारी है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि अंडरपास की ऊंचाई और सड़क की स्थिति में सुधार नहीं किया गया तो भविष्य में भी ऐसे हादसे हो सकते हैं। फिलहाल मशीन को सुरक्षित हटाकर मार्ग को सामान्य कर दिया गया है, लेकिन घटना ने हाईवे सुरक्षा और समन्वय व्यवस्था पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

सोनभद्र से जितेंद्र प्रसाद।
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