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करंट ने छीन लिया परिवार का सहारा: कनहर परियोजना हादसे में विजय यादव की मौत, चार मासूम बच्चों का भविष्य अधेरा में

करंट ने छीन लिया परिवार का सहारा: कनहर परियोजना हादसे में विजय यादव की मौत, चार मासूम बच्चों का भविष्य अधेरा में

सोनभद्र/कनहर परियोजना के तहत सिंचाई विभाग द्वारा कराए जा रहे कार्य के दौरान हुई एक दर्दनाक दुर्घटना ने पूरे क्षेत्र को गहरे शोक में डुबो दिया। ग्राम पंचायत कुड़वा में 31 जनवरी 2026, शनिवार शाम लगभग 4:00 बजे एम एस ए कंपनी के अंतर्गत लेबल स्टेप दिखाने के दौरान मजदूर विजय कुमार यादव (पुत्र नंदकिशोर यादव) 11,000 हाई वोल्टेज करंट की चपेट में आ गए। करंट लगते ही विजय जमीन पर गिर पड़े और मौके पर ही उनकी मौत हो गई। यह हादसा कार्यस्थल पर सुरक्षा मानकों की अनदेखी को लेकर गंभीर सवाल खड़े करता है।


घटना के बाद परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। विजय ही पूरे परिवार का एकमात्र कमाने वाला सदस्य थे। तीसरे दिन दुद्धी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में पोस्टमार्टम कराया गया, लेकिन पोस्टमार्टम के बाद भी जब एम एस ए कंपनी की ओर से किसी तरह का स्पष्ट आश्वासन नहीं मिला, तो परिजनों और ग्रामीणों का सब्र जवाब दे गया। न्याय और मुआवजे की मांग को लेकर आक्रोशित परिजनों ने नेशनल हाईवे एनएच-39 को जाम कर दिया, जिससे घंटों यातायात बाधित रहा।
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए दुद्धी क्षेत्राधिकारी (सीओ) मौके पर पहुंचे। उन्होंने मृतक के भाई संजय यादव और अन्य परिजनों से बातचीत की और काफी मशक्कत के बाद एम एस ए कंपनी के आए दो स्टाफ को बुलवाया। विण्ढमगंज थाने पर देर रात लगभग 12:30 बजे मृतक के भाई संजय यादव, चाचा गोपाल यादव और ससुर की उपस्थिति में सुलह-समझौता कराया गया। कंपनी की ओर से मृतक की पत्नी और बच्चों के पालन-पोषण को लेकर संतोषजनक आश्वासन दिया गया, जिसके बाद प्रशासन की देखरेख में हाईवे से जाम हटवाया गया और शव को परिजनों को सौंपा गया। परिजनों ने बताया कि अंतिम संस्कार अगले दिन सुबह किया जाएगा।
स्थानीय लोगों के अनुसार विजय कुमार यादव बीते लगभग दस वर्षों से एम एस ए और एचईएस कंपनी में लगातार काम कर रहे थे। इसके बावजूद शव को करीब 60 घंटे तक रखे जाने से शरीर से बदबू आने लगी, जिसे लोग कंपनी की घोर लापरवाही और असंवेदनशीलता बता रहे हैं। यह व्यवहार परिवार के दर्द को और गहरा कर गया।
विजय अपने पीछे दो बेटियां और दो बेटे छोड़ गए हैं। उनकी पत्नी हाल ही में ऑपरेशन से गुज़री थीं और पहले से ही शारीरिक कमजोरी व मानसिक तनाव में थीं। दुखद संयोग यह भी है कि विजय के पिता का निधन मात्र आठ महीने पहले ही हुआ था। घर में अब एक बूढ़ी मां और छोटा भाई संजय यादव ही सहारा बचे हैं। अचानक पिता का साया उठ जाने से चारों बच्चे अनाथ हो गए हैं और उनका भविष्य चिंता का विषय बन गया है।
यह हादसा सिर्फ एक परिवार की त्रासदी नहीं, बल्कि उन हजारों मजदूरों की सच्चाई है, जो रोज़ी-रोटी के लिए जोखिम भरे काम करते हैं। हालांकि प्रशासन की पहल से मिले आश्वासन ने पीड़ित परिवार के लिए उम्मीद की एक छोटी-सी किरण जरूर जगाई है, लेकिन यह घटना यह सोचने पर मजबूर करती है कि क्या किसी की जान जाने के बाद ही जिम्मेदारियां याद आती हैं।
सोनभद्र से — जितेन्द्र प्रसाद
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