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कागज़ों में चलता लेखपाल कार्यालय, ज़मीनी हकीकत में ताला बुटवेढवा में किसानों की सुनवाई ठप शासन प्रशासन मौन।


कागज़ों में चलता लेखपाल कार्यालय, ज़मीनी हकीकत में ताला—बुटवेढवा में किसानों की सुनवाई ठप शासन प्रशासन मौन।


विण्ढमगंज क्षेत्र अंतर्गत ग्राम पंचायत बुटवेढवा में बने लेखपाल आवास पर वर्षों से ताला लटका है। हैरानी की बात यह है कि जहां किसानों की जमीन से जुड़ी समस्याओं के समाधान का केंद्र होना चाहिए, वही लेखपाल कार्यालय आज पहचान से बाहर हो चुका है। लेखपाल और कानूनगो दोनों की लगातार नदारदी से किसान बेहाल हैं। लेखपाल आवास के सामने अस्थायी दुकानें खड़ी कर दी गई हैं, जिससे न तो कार्यालय का दरवाजा दिखता है और न ही आने-जाने का रास्ता बचा है। यह स्थिति प्रशासनिक उदासीनता की जीती-जागती मिसाल बन चुकी है।


स्थानीय किसानों का कहना है कि जमीन से जुड़े कागजात—खतौनी, दाखिल-खारिज, पैमाइश, त्रुटि सुधार—के लिए उन्हें दर-दर भटकना पड़ता है। समय पर लेखपाल न मिलने से फसल ऋण, बीमा, मुआवजा और सरकारी योजनाओं का लाभ अटक जाता है। अन्नदाता कहे जाने वाले किसान आज अपनी ही जमीन के कागजों के लिए अपमानजनक हालात झेलने को मजबूर हैं। यदि बुटवेढवा का लेखपाल कार्यालय नियमित रूप से संचालित होता, तो किसानों को बाहर के चक्कर नहीं काटने पड़ते।
सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि ग्राम प्रधान से लेकर संबंधित अधिकारियों और शासन-प्रशासन तक की चुप्पी बनी हुई है। न तो अतिक्रमण हटाने की पहल हो रही है और न ही कार्यालय को सक्रिय करने की ठोस कार्रवाई। यह सवाल अब पूरे उत्तर प्रदेश के प्रशासनिक तंत्र की कार्यप्रणाली पर खड़ा हो रहा है।
अब देखना यह है कि कब खुलेगा बुटवेढवा का लेखपाल कार्यालय, कब तैनात होंगे जिम्मेदार अधिकारी और कब मिलेगा विण्ढमगंज क्षेत्र के किसानों को उनका हक। शासन और उच्च अधिकारियों से मांग है कि तत्काल संज्ञान लेकर कार्यालय को सुचारु कराया जाए, अतिक्रमण हटे और किसानों को राहत मिले।
विण्ढमगंज, सोनभद्र से—जितेन्द्र प्रसाद
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