संतोषजनक जवाब नहीं देने पर होगा एक्शन
चुनाव आयोग के प्रावधान के अनुसार, अगर प्रत्याशी का जवाब संतोषजनक नहीं पाया गया, तो उन पर 6 साल तक चुनाव लड़ने पर रोक लग सकती है. इस तरह के मामलों में उम्मीदवार अयोग्य भी घोषित किए जा सकते हैं. ऐसे में चुनाव आयोग ने एक मौका देते हुए आरोप के घेरे में आए सभी प्रत्याशियों को एक महीने का समय देते हुए जवाब दाखिल करने का मौका दिया है.
आरोप के घेरे में आए जिन 13 विधानसभा सीटों के प्रत्याशी सूचीबद्ध हैं, उनमें राजमहल, महागामा, बड़कागांव, रामगढ़, मांडू, बगोदर, गांडेय, पाकुड़, छतरपुर, हुसैनाबाद, गढ़वा और भवनाथपुर शामिल हैं.
इन क्षेत्रों के 22 उम्मीदवारों में अधीर कुमार मंडल, नईम शेख, अमित कुमार, मालतो, मुकेश सोरेन, कृष्ण मोहन चौबे, फुलेश्वर महतो, लालदेव मुंडा, सुनील कुमार बेड़िया, सुंदरनाथ बेड़िआ, धर्मेंद्र प्रसाद, पंकज कुमार, मुख्तार खान, श्रीकांत प्रसाद, समीम अख्तर, पंकज कुमार जायसवाल, रितेश कुमार गुप्ता, प्रीति राज, अनिल मांझी, कामेश्वर पासवान, मुकेश चौधरी, राम प्यारे पाल, घनश्याम पाठक और राजेश बैठा के नाम शामिल हैं. आरोप के घेरे में आए सभी प्रत्याशी निर्दलीय के रूप में पिछले झारखंड विधानसभा चुनाव के दौरान किस्मत आजमाने उतरे थे.
यदि इन प्रत्याशियों के द्वारा चुनाव खर्च का ब्यौरा नहीं दिए जाने के साथ-साथ आयोग के नोटिस का संतोषजनक जवाब नहीं दिया जाता है तो इन्हें लेने के देने पड़ जाएंगे.



